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Wednesday, September 12, 2018

हडप्पा कालीन नगर - 2


हडप्पा कालीन नगर - 2 

चन्हूदड़ो -


  • यह नगर पाकिस्तान के सिंध प्रान्त में सिंधु नदी के तट पर पाया गया है। 
  • इसकी खोज सं 1931 में NG मजूमदार ने तथा बाद में विस्तृत जानकारी सं 1935 में मैके ने प्राप्त की। 
  • यह नगर झूकर झांगर संस्कृति का अंग था। 
  • यह से कोई भी टीला दुर्गीकृत नहीं पाया गया। 
  • यह मनका बनाने के कारखाने प्राप्त हुए है जो लोथल से बड़े है। 
  •  लिपस्टिक , कंघा , इत्र प्राप्त हुआ है।  जो की सौंदर्य प्रसाधन का प्रतीक है। 
  • यह से वक्राकार ईंटे पायी गयी है जिनमे से एक में कुत्ते द्वारा बिल्ली का पीछा करने के पैरो के निशान प्राप्त है।  

कालीबंगा -


  • राजस्थान के गंगानगर जिले में घघ्घर नदी के तट पर खोजा गया है।  
  • इसको सं 1957 में अमलानंद घोष ने तथा बाद में सं 1960 में BK  खोजा। 
  • कालीबंगा का शाब्दिक अर्थ है - काले रंग की चूड़ियां। 
  • इस नगर के दोनों टीले  अलग अलग रक्षा  प्राचीर से घिरे थे। 
  • यह से प्राप्त एक मिटटी की पट्टिका में एक ओर सव्वंग युक्त देवता और दूसरी ओर मनुष्य और बकरी के चित्र प्राप्त हुए है। 
  • यह से जुते खेत प्राप्त हुए है तथा चना , सरसो आदि के अवशेष प्राप्त हुए है जो की प्राक हड़प्पा कालीन है। 
  • 7 अग्नि कुंड प्राप्त है। 
  • यह के एक बच्चे की खोपड़ी प्राप्त हुई है जिसमे 6 छेद है जो की शल्य चिकित्सा के प्रमाण है। 
  • यह के प्राप्त अन्य वस्तुओ में अलंकृत ईंट , कच्चे घर , ऊँट की हड्डिया। 
  • इस नगर का पतन भूकंप के कारण हुआ था। 

धौलावीरा -



  • यह नगर गुजरात के भचाऊ जिले के खदिर द्वीप के उत्तरी भाग में खोजा  गया है। 
  • यह एक आयताकार नगर है।  
  • इस नगर की खोज सं 1967-68 में जगपति जोशी ने की थी। जबकि इसका उत्खनन सं 1990 में प्रारम्भ हुआ। 
  • यह नगर तीन भागो में विभक्त था।  पूर्वी तथा पश्चिमी टीले के मध्य मध्यमा टीला भी पाया गया है। 
  • इस नगर से स्टेडियम के साक्ष्य भी प्राप्त हुए है।  
  • इस नगर से एक नेम प्लेट भी प्राप्त हुआ जिस पर 10 अक्षर लिखे हुए है।
  • इस नगर के 30%भूभाग पर बड़े तालाब है तथा 2 नहरे भी है जो की जल प्रबंधन की उच्च कोटि की व्यवस्था को दर्शाता है। 
  • यह से प्राप्त जलकुंड शैलकृत स्थापत्य का नमूना है। 


बनवाली -


  • यह नगर हरियाणा के हिसार जिले में खोजै गया है। 
  • इस  नगर की खोज सं 1973 में R.S.बिष्ट ने की थी। 
  • यह से अच्छे किस्म के जौ  के साक्ष्य मिले है। 
  • मिटटी के बने हल की आकृति प्राप्त हुई है। 
  • यह से जल निकास की अव्यवस्थित प्रणाली प्राप्त हुई है। 



भारत में खोजे गए अन्य स्थल 

मांडा - 


  • यह जम्मू कश्मीर में खोजा गया है। 
  • यह इस सभ्यता का सबसे उत्तरी स्थल है। 
  • यह चिनाव नदी के तट पर बसा था। 

रोपड़ (पंजाब)- 


  • स्वतंत्रता के बाद पहला उत्खनित स्थान है। 
  • इसका आधुनिक नाम रूपनगर है। 
  • यह से मालिक के साथ कुत्ते को दफनाने के साक्ष्य मिले है। 


दधेरी (पंजाब)-


  • यह परवर्ती हड़प्पा कालीन स्थल था।  

संघोल (पंजाब)-


  • यह से ताँबे की छेनिया प्राप्त हुई है। 
  • यह से वृत्ताकार अग्निकुंड के साक्ष्य मिले है 

राखीगढ़ी (हरियाणा)- 


  • भारत में खोजा गया हड़प्पा काल का सबसे बड़ा स्थल है।  

कुणाल (हरियणा)- 


  • यह से चांदी के दो मुकुट मिले है। 

सनौली (बागपत , उत्तर प्रदेश)-

  • यह से 125 समाधिया मिली है। 
  • यह से जानवरो की हड्डिया मिली है। 

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से खोजे गए स्थल -

बड़ागाव  
हुलास 
अम्बाखेड़ा 
सकतपुर - यह सं 2017 में खोजा गया नवीनतम स्थल है। 

उत्तर प्रदेश के मेरठ से खोजे गए स्थल - 

आलमगीरपुर - यह हिंडन नदी के तट पर बसा था। तथा इस सभ्यता का सबसे पूर्वी स्थल है। 
हस्तिनापुर 
भगवानपुरा 

सुरकोतड़ा (गुजरात)-

  • यह कच्छ की खाड़ी  के क्षेत्र में खोजा गया है। 
  • यह से घोड़े का कंकाल प्राप्त हुआ है। 
  • इस नगर के दोनों टीले एक ही प्राचीर से घिरे हुए थे। 
  • इसका पतन भूकंप से हुआ। 

रंगपुर (गुजरात)-

  • यह स्थल अहमदाबाद के काठियावाड़ क्षेत्र (सौराष्ट्र) में खोजा  गया है। 
  • यह भादर नदी के तट पर बसा था। 
  • यह से धान की भूसी प्राप्त हुई है। 

दैमाबाद (महाराष्ट्र)-


  • यह सबसे दक्षिणी स्थल है। 
  • यह स्थल नगर अहमदनगर जिले में गोदावरी की सहायक प्रवरा नदी के तट पर बसा था। 



पाकिस्तान में खोजे गए स्थल -

गनेरीवाला (पंजाब)-


  • यह क्षेत्रफल की दृष्टि से इस सभ्यता का सबसे बड़ा स्थल था। 

सिन्ध प्रान्त में खोजे गए स्थल -

कोटदीजी - यह से अलंकृत खम्भा , तथा पत्थर के तीर मिले है। 
आमरी - यह से बारहसिंघा के साक्ष्य मिले है।  
अलीमुराद - यह हड़प्पा सभ्यता का एकमात्र ग्रामीण स्थल था। 
जदिरदड़ो - यह से स्टेडियम के साक्ष्य मिले है। 
अल्लादिनो - यह स्थल अरब सागर तथा सिंधु नदी के तट पर बसा बन्दरगाही नगर था। 


बलूचिस्तान में खोजे गए स्थल -

नौसारो - यह से सिंदूर के साक्ष्य मिले है। 
बालाकोट - यह से सीप  उद्योग के साक्ष्य मिले  है। 
सोत्काकोह - शादीकौर नदी के तट पर बसा था। 
सुतकागेंडोर 

Monday, September 3, 2018

सिंधु घाटी सभ्यता - 2 / उत्पत्ति, नगर

                                  

 उत्पत्ति -

सिंधु घाटी सभ्यता की उत्पत्ति एवं विकास को लेकर विद्वानों का अलग अलग मत है- 
१. विदेशी उत्पत्ति का मत 
२. देशी उत्पत्ति का मत 


विदेशी उत्पत्ति का मत - इस मत के अनुसार हड़प्पा सभ्यता की उत्पत्ति मेसोपोटामिया की सभ्यता के विस्तार स्वरुप हुई थी। इस मत के समर्थन करने वाले विद्वानों में जॉन मार्शल , क्रेमर , H.D. सांकलिया प्रमुख है।KNOW MORE  



देशी उत्पत्ति का मत (क्रमिक विकास) - इस मत को मानने वालो में भी  अलग अलग मत है - 
१. ईरानी - बलूचिस्तान सभ्यता का विकास 
इस मत के प्रमुख पक्षधर विद्वान फेयर सर्विसव तथा रोमिला थापर है।  
२. सोथी संस्कृति का विकास - 
इस मत के प्रमुख पक्षधर विद्वानों में अम्लानन्द घोष , आल्चिन दम्पति तथा D.P. अग्रवाल है। 
नोट - साथी संस्कृति की खोज सं 1953 में अमलानंद घोष ने राजस्थान में की थी। 

ड़प्पा कालीन नगर
 सिंधु घाटी सभ्यता को प्रथम नगरीय सभ्यता कहते है तथापि इसमें खोजे गए 1400 से अधिक स्थलों में केवल 7 स्थलों को ही नगर की संज्ञा दी गयी है।  जो  निम्न है - 

१. हड़प्पा 

२. मोहनजोदड़ो 

३. लोथल 

४. धौलावीरा 

५. कालीबंगा 

६. चन्हूदड़ो 

७. बनवाली 


नोट - सभी नगर दो भागो में बटे थे - 
. पूर्वी टीला - नगर 
२. पश्चिमी टीला - यह दुर्ग या गढ़ी था जहां उच्च वर्ग के लोग रहते थे।  KNOW MORE


हड़प्पा - 



  • यह नगर पकिस्तान के पंजाब प्रान्त के मांटगुमरी जिला (आधुनिक शाहीवाल) में स्थित था।  
  • यह रावी नदी के बाये तट पर बसा था।  
  • पश्चिमी टीला दुर्ग से घिरा था।  जिसे AB टीला नाम दिया गया  है।  
  • AB टीले के उत्तर में F टीला पाया गया।  जिसमे अन्नागार (दी पंक्तियों में 6+6=12) , 15 श्रमिक आवास , 18 वृत्ताकार चबूतरे मिले है। 
  • गेहूं व जौ के दाने के साक्ष्य मिले है। 
  • AB टीला से लकड़ी की कब्र मिली है जिसे R-37 नाम दिया गया है। 
  • इस नगर के खोज से सम्बंधित व्यक्ति -
  1.  निदेशक - जॉन मार्शल 
  2. उत्खननकर्ता - दयाराम साहनी 
  3. सहायक - माधवस्वरूप वत्स 
  • यह नगर सन 1921 में खोजा गया। 
  • नगर क्षेत्र से ताम्बे की इक्कागाड़ी तथा सर्वाधिक अभिलेखी मुहरों के साक्ष्य मिले है। 

मोहनजोदड़ो -


  • नगर पाकिस्तान के सिंध प्रान्त के लरकाना जिले में पाया गया।  
  • यह सिंधु नदी के दाएं तट पर बसा है। 
  • 1922 में राखालदास बनर्जी द्वारा इसे उत्खनित (खोजा) किया गया। 
  • जॉन मार्शल के अनुसार यह नगर सात बार बाढ़ के डूबा था।  
  • KUR कैनेडी के अनुसार भीषण मलेरिया के इस नगर का पतन हुआ। 
  • यह नगर इस सभ्यता का सर्वाधिक जनसँख्या वाला नगर था जिसकी कुल आबादी लगभग 35 से 40  हज़ार थी। KNOW MORE
  • इसके अन्य उपनाम इस प्रकार है - 
  1. मृतकों का टीला 
  2. प्रेतों का नगर 
  3. सिंधु का बाग 
  4. स्तूप टीला 
  • हड़प्पा तथा मोहनजोदड़ो को जुड़वाँ राजधानी कहा गया है। 
  • क्षेत्रफल की दृष्टि से यह नगर इस सभ्यता का दूसरा सबसे बड़ा नगर था।
  • पश्चिमी टीले से सभा भवन, पुरोहित आवास , महाविद्यालय तथा घर आदि के साक्ष्य मिले है 
  • प्रत्येक घर से कुंआ , स्नानागार , 3 से 4 कमरे , तथा दोकमंजिला घर प्राप्त हुए है।  
  • पश्चिमी टीले में अन्नागार , वृहत स्नानागार (जॉन मार्शल के अनुसार तत्कालीन विश्व का सबसे बड़ा आश्चर्य) प्राप्त हुआ है। 
  • सबसे बड़ी इमरती संरचना अन्नागार प्राप्त हुई है। 
  • पूर्वी टीले से प्राप्त कुछ विशेष साक्ष्य -
  1. 10 इंच की कांस्यमूर्ति प्रोटोस्टाइलट प्रजाति की। 
  2. 1200 मुहरे (सर्वाधिक) वर्गाकार प्राप्त हुई है।  
  3. सूती कपडा चाकू के साथ। 
  4. एक 10 मीटर चौड़ा राजपथ मार्ग पाया गया। 
  5. पक्की सड़को का एक मात्र स्थान पाया गया।  




 लोथल 



  •  यह नगर भारत के गुजरात में अहमदाबाद जिले में पाया गया है। 
  • यह भोगवा नदी के तट पर खंभात की खाड़ी के समीप पाया गया है। 
  • इसकी खोज SR राव ने सन 1954  की। 
  • इसे लघु हड़प्पा या लघु मोहनजोदड़ो भी कहते है। 
  • यहां से 20 समाधियां पायी गयी है। इसे मुर्दो का नगर भी कहा जाता है। 
  • 3 युग्मित (स्त्री + पुरुष) समाधियां पायी गयी है। जो की सती प्रथा का प्रतीक है।  
  • दोनो टीले एक ही प्राचीर से घिरे थे। ( सुरकोतड़ा में भी) 
  • रंगाई कुंड , आटा पीसने की चक्की , मनका बनाने के कारखाने आदि के साक्ष्य प्राप्त हुए है। 
  • अग्निकुंड के साक्ष्य प्राप्त हुए है।  
  • धान तथा बाजरा के साक्ष्य।
  • ममी का मॉडल प्राप्त हुआ है। KNOW MORE
  • गोरिल्ला व बारहसिंहा के छाप की मुहरे प्राप्त हुई है। 
  • दो मुँह वाले राक्षस छाप की मुहरे प्राप्त हुई जो की फारस से सम्बंधित है। 
  • गोड़ीवाड़ा बंदरगाह प्राप्त हुआ। 
  • हाथी दन्त का पैमाना प्राप्त हुआ है। 


सिंधु घाटी सभ्यता - 1 / भूमिका, विस्तार, कालक्रम


               

सिंधु घाटी सभ्यता

सिंधु घाटी सभ्यता के विस्तृत अध्ययन के लिए हम इसे निम्न भागो  में बांटकर अधययन करेंगे। 
१. भूमिका 
२. विस्तार 
३. कालक्रम
४.  उत्पत्ति 
५. प्रमुख स्थान  
६. अन्य स्थान 
७. सामाजिक व धार्मिक जीवन 
८.  आर्थिक जीवन 
९. पतन के कारण 


भूमिका
सिंधु घाटी सभ्यता की खोज से पहले भारत प्रामाणिक विकसित और क्रमबद्ध इतिहास का आरंभ वैदिक सभ्यता से माना जाता था किन्तु इस सभ्यता की खोज में भारतीय इतिहास के आरम्भ को बदल दिया।  तथा विकसित भारतीय सभ्यता के कालक्रम में 1500 वर्षो का इतिहास जोड़ दिया।

सिंधु घाटी सभ्यता को अन्य नामो से भी जाना जाता है जो की इस प्रकार है - 
  1. हड़प्पा सभ्यता 
  2. सिंधु घटी सभ्यता 
  3. सरस्वती सभ्यता 
  4. प्रथम नगरीय क्रांति की सभ्यता 
  5. कांस्य युगीन सभ्यता 
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  • इस सभ्यता का आकार त्रिभुजाकार है तथा वर्तमान समय तक खोजे गए प्रमाणों के आधार पर इस सभ्यता का विस्तार 20 लाख किमी० है।  
  • 1826 ई० में सर्वप्रथम चार्ल्स मेमन का ध्यान हड़प्पा टीले की ओर आकर्षित हुआ।  तत्पश्चात 1853-56 ई० के मध्य रेलवे लाइन बिछाते समय जॉन ब्रंटन था विलियम ब्रंटन का भी ध्यान आकर्षित हुआ किन्तु अभी तक इसे किसी ने अधिक गंभीरता से नहीं लिया।  
  • 1921 ई० को तत्कालीन भारतीय पुरातत्व एवं खनन विभाग के अध्यक्ष जॉन मार्शल के आदेशो पर दयाराम साहनी (प्रमुख उतखननकर्ता) की अगुवाई में हड़प्पा नामक नगर खोजा गया।  जिससे पुरातत्व विभाग का ध्यान विशेष रूप से इस सभ्यता की ओर आकर्षित हुआ।  



विस्तार
हड़प्पा नगर की खोज के बाद इस सभ्यता के एक के बाद एक अनेक नगर खोजे गए। KNOW MORE 

सिंध (पाकिस्तान) - मोहनजोदड़ो , चन्हूदड़ो , कोटजीदी , आमरी , अलीमुराद 
पंजाब (पाकिस्तान)- हड़प्पा, जलीलपुर , रहमानदेरी 

जम्मू कश्मीर (भारत)- मांडा 
पंजाब (भारत)- रोपड़ , संघोल 
हरियाणा (भारत) - राखीगढ़ी , बनवाली , मिताथल, बालू , कुनाल , सीसवाल 
राजस्थान (भारत) - कालीबंगा 
उत्तर प्रदेश (भारत)- सहारनपुर में बड़ागांव तथा हुलर।मेरठ में आलमगीरपुर। 
गुजरात (भारत ) - कच्छ की खाड़ी में- सुरकोतड़ा , धौलावीरा , देसलपुर।  खम्भात की खाड़ी में- लोथल, रंगपुर, भगदराव, मेघम ,कुन्तासी तथा शिकारपुर।  

नोट - सबसे अधिक स्थल गुजरात में प्राप्त हुए है। 

  • इस सभ्यता का सबसे पूर्वी स्थल - आलमगीरपुर 
  • इस सभ्यता का सबसे पश्चिमी स्थल - सुतकागेंडोर 
  • इस सभ्यता का सबसे उत्तरी स्थल - मांडा 
  • इस सभ्यता का सबसे दक्षिणी स्थल - दैमाबाद 
  •  सभ्यता का पूर्व के पश्चिम की और विस्तार - 1600 KM
  • इस सभ्यता का  उत्तर से दक्षिण की विस्तार - 1400 KM
  • इस सभ्यता की जल सीमा - 1300 KM


  • 1947 ई० तक हुए 40 स्थलों की खोज में अधिकतर सिंधु नदी के तट पर थे।  जिस कारन इस सभ्यता का नाम सिंधु घाटी सभ्यता पड़ा।  
  • वर्त्तमान में 1400 स्थलों में सर्वाधिक 1100 स्थल सरस्वती (विलुप्त) नदी या घघ्घर नदी के तट पर पाए गए है। 
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कालक्रम
हड़प्पा सभ्यता का काल कब से कब तक रहा इस बात को लेकर विद्वानों में मतभेद है
सही कालखंड न जान पाने के कारन 
१. लिपि का न पढ़ा जा सकना 
२. लम्बवत खुदाई में समस्या 

इन समस्याओं के बावजूद विद्वानों ने अलग अलग कालक्रम को माना है जिनमे कुछ प्रमुख इस प्रकार है - 
  1. फादर H. हेरास -  6000 BC
  2. सर जॉन मार्शल - 3250 - 2750 BC
  3. मार्टिल व्हीलर - 2500 - 1500 BC
  4. फेयर सर्विस - 2350 - 1750 BC 
  5. रेडियो कार्बन विधि - 2000 - 1500LNOW MORE

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