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Sunday, September 23, 2018

भारतीय संविधान CHAPTER - 5 / भारतीय संविधान के स्त्रोत


भारतीय संविधान के स्त्रोत 
भारत का संविधान अनेक देशो के संविधान से मिलकर बना है जिनका विवरण इस प्रकार है।


भारतीय अथवा देसी स्त्रोत -
भारत सरकार अधिनियम - 1909
भारत सरकार अधिनियम - 1919
नेहरू रिपोर्ट - 1928
साइमन कमीशन - 1930
भारत सरकार अधिनियम - 1935
भारत सरकार अधिनियम - 1935  का  भारत के संविधान में सर्वाधिक प्रभाव पड़ा है। भारतीय संविधान के 350 अनुच्छेद में से लगभग 250 अनुच्छेद ऐसे है जो की भारत सरकार अधिनियम - 1935 से या तो शब्दशः ले लिए गए है अथवा उनमे बहुत थोड़ा परिवर्तन के साथ लिया गया है। इन नियमो में कुछ प्रमुख नियम इस प्रकार है। -
१. अध्यादेश
२. अनुच्छेद -143
३. तदर्थ नियुक्तियां
४. CAG
५. प्रशासनिक ब्यौरे
६. लोक सेवा आयोग
७. राज्यपाल
८. त्रिसूची प्रणाली
९. आपातकाल

विदेशी स्त्रोत -
भारतीय संविधान में जिन देशो का सर्वाधिक प्रभाव पड़ा है वे इस प्रकार है।  -
ब्रिटेन -
१. संसदीय प्रक्रिया
२. विधि निर्माण प्रक्रिया
३. संसदीय विशेषाधिकार
४. एकल नागरिकता
५. विधि का शासन
६. राष्ट्रपति का अभिभाषण
७. बहुमत प्रणाली
८. विधि के समक्ष समानता

संयुक्त राज्य अमेरिका -
१. राष्ट्राध्यक्ष
२. महाभियोग
३. उपराष्ट्रपति
४. मौलिक अधिकार
५. संविधान की सर्वोच्चता
६. नन्यायलय की स्वतंत्रता
७. समुदायिक विकास कार्यक्रम
८. विधि का सामान संरक्षण
HC / SC के न्यायधीशो को हटाने की प्रक्रिया
१०. संविधान संशोधन में राज्यों का अनुमोदन

कनाडा -
१. संघीय शासन व्यवस्था 
२. राज्यों का संघ (ब्रिटिश नार्थ अमेरिका अधिनियम)
३. राज्यपाल , राष्ट्रपति के प्रसाद पर्यन्त पद 
४. राज्य्पाल द्वारा राष्ट्रपति के विचारार्थ विधेयक को प्रारक्षित करने का अधिकार 

ऑस्ट्रेलिया - 
१. समवर्ती सूची 
२. प्रस्तावना में प्रयुक्त भाषा 
३. उद्देशिका में निहित भावनाएं

दक्षिण अफ्रीका -
१. संविधान संशोधन की प्रक्रिया 

आयरलैंड -
१. राष्ट्र के नीतिे निदेशक तत्त्व 
२. राष्ट्रपति का निर्वाचन प्रणाली 
३. राज्यसभा में सदस्यों का मनोनयन 

फ्रांस -
१. गणतांत्रिक व्यवस्था 
२. वयोवृद्ध सदस्यों का उचित स्थान 

सोवियत संघ रूस -
१. मूल कर्तव्य 
२. पंचवर्षीय योजना 

जर्मनी -
१. आपातकाल में मूल अधिकारों का निलंबन 

जापान -
१. विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया 

स्विट्ज़रलैंड -
१. सामाजिक नीतियों के सन्दर्भ में निति निदेशक तत्वों का उपबंध 

Wednesday, September 12, 2018

हडप्पा कालीन नगर - 2


हडप्पा कालीन नगर - 2 

चन्हूदड़ो -


  • यह नगर पाकिस्तान के सिंध प्रान्त में सिंधु नदी के तट पर पाया गया है। 
  • इसकी खोज सं 1931 में NG मजूमदार ने तथा बाद में विस्तृत जानकारी सं 1935 में मैके ने प्राप्त की। 
  • यह नगर झूकर झांगर संस्कृति का अंग था। 
  • यह से कोई भी टीला दुर्गीकृत नहीं पाया गया। 
  • यह मनका बनाने के कारखाने प्राप्त हुए है जो लोथल से बड़े है। 
  •  लिपस्टिक , कंघा , इत्र प्राप्त हुआ है।  जो की सौंदर्य प्रसाधन का प्रतीक है। 
  • यह से वक्राकार ईंटे पायी गयी है जिनमे से एक में कुत्ते द्वारा बिल्ली का पीछा करने के पैरो के निशान प्राप्त है।  

कालीबंगा -


  • राजस्थान के गंगानगर जिले में घघ्घर नदी के तट पर खोजा गया है।  
  • इसको सं 1957 में अमलानंद घोष ने तथा बाद में सं 1960 में BK  खोजा। 
  • कालीबंगा का शाब्दिक अर्थ है - काले रंग की चूड़ियां। 
  • इस नगर के दोनों टीले  अलग अलग रक्षा  प्राचीर से घिरे थे। 
  • यह से प्राप्त एक मिटटी की पट्टिका में एक ओर सव्वंग युक्त देवता और दूसरी ओर मनुष्य और बकरी के चित्र प्राप्त हुए है। 
  • यह से जुते खेत प्राप्त हुए है तथा चना , सरसो आदि के अवशेष प्राप्त हुए है जो की प्राक हड़प्पा कालीन है। 
  • 7 अग्नि कुंड प्राप्त है। 
  • यह के एक बच्चे की खोपड़ी प्राप्त हुई है जिसमे 6 छेद है जो की शल्य चिकित्सा के प्रमाण है। 
  • यह के प्राप्त अन्य वस्तुओ में अलंकृत ईंट , कच्चे घर , ऊँट की हड्डिया। 
  • इस नगर का पतन भूकंप के कारण हुआ था। 

धौलावीरा -



  • यह नगर गुजरात के भचाऊ जिले के खदिर द्वीप के उत्तरी भाग में खोजा  गया है। 
  • यह एक आयताकार नगर है।  
  • इस नगर की खोज सं 1967-68 में जगपति जोशी ने की थी। जबकि इसका उत्खनन सं 1990 में प्रारम्भ हुआ। 
  • यह नगर तीन भागो में विभक्त था।  पूर्वी तथा पश्चिमी टीले के मध्य मध्यमा टीला भी पाया गया है। 
  • इस नगर से स्टेडियम के साक्ष्य भी प्राप्त हुए है।  
  • इस नगर से एक नेम प्लेट भी प्राप्त हुआ जिस पर 10 अक्षर लिखे हुए है।
  • इस नगर के 30%भूभाग पर बड़े तालाब है तथा 2 नहरे भी है जो की जल प्रबंधन की उच्च कोटि की व्यवस्था को दर्शाता है। 
  • यह से प्राप्त जलकुंड शैलकृत स्थापत्य का नमूना है। 


बनवाली -


  • यह नगर हरियाणा के हिसार जिले में खोजै गया है। 
  • इस  नगर की खोज सं 1973 में R.S.बिष्ट ने की थी। 
  • यह से अच्छे किस्म के जौ  के साक्ष्य मिले है। 
  • मिटटी के बने हल की आकृति प्राप्त हुई है। 
  • यह से जल निकास की अव्यवस्थित प्रणाली प्राप्त हुई है। 



भारत में खोजे गए अन्य स्थल 

मांडा - 


  • यह जम्मू कश्मीर में खोजा गया है। 
  • यह इस सभ्यता का सबसे उत्तरी स्थल है। 
  • यह चिनाव नदी के तट पर बसा था। 

रोपड़ (पंजाब)- 


  • स्वतंत्रता के बाद पहला उत्खनित स्थान है। 
  • इसका आधुनिक नाम रूपनगर है। 
  • यह से मालिक के साथ कुत्ते को दफनाने के साक्ष्य मिले है। 


दधेरी (पंजाब)-


  • यह परवर्ती हड़प्पा कालीन स्थल था।  

संघोल (पंजाब)-


  • यह से ताँबे की छेनिया प्राप्त हुई है। 
  • यह से वृत्ताकार अग्निकुंड के साक्ष्य मिले है 

राखीगढ़ी (हरियाणा)- 


  • भारत में खोजा गया हड़प्पा काल का सबसे बड़ा स्थल है।  

कुणाल (हरियणा)- 


  • यह से चांदी के दो मुकुट मिले है। 

सनौली (बागपत , उत्तर प्रदेश)-

  • यह से 125 समाधिया मिली है। 
  • यह से जानवरो की हड्डिया मिली है। 

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से खोजे गए स्थल -

बड़ागाव  
हुलास 
अम्बाखेड़ा 
सकतपुर - यह सं 2017 में खोजा गया नवीनतम स्थल है। 

उत्तर प्रदेश के मेरठ से खोजे गए स्थल - 

आलमगीरपुर - यह हिंडन नदी के तट पर बसा था। तथा इस सभ्यता का सबसे पूर्वी स्थल है। 
हस्तिनापुर 
भगवानपुरा 

सुरकोतड़ा (गुजरात)-

  • यह कच्छ की खाड़ी  के क्षेत्र में खोजा गया है। 
  • यह से घोड़े का कंकाल प्राप्त हुआ है। 
  • इस नगर के दोनों टीले एक ही प्राचीर से घिरे हुए थे। 
  • इसका पतन भूकंप से हुआ। 

रंगपुर (गुजरात)-

  • यह स्थल अहमदाबाद के काठियावाड़ क्षेत्र (सौराष्ट्र) में खोजा  गया है। 
  • यह भादर नदी के तट पर बसा था। 
  • यह से धान की भूसी प्राप्त हुई है। 

दैमाबाद (महाराष्ट्र)-


  • यह सबसे दक्षिणी स्थल है। 
  • यह स्थल नगर अहमदनगर जिले में गोदावरी की सहायक प्रवरा नदी के तट पर बसा था। 



पाकिस्तान में खोजे गए स्थल -

गनेरीवाला (पंजाब)-


  • यह क्षेत्रफल की दृष्टि से इस सभ्यता का सबसे बड़ा स्थल था। 

सिन्ध प्रान्त में खोजे गए स्थल -

कोटदीजी - यह से अलंकृत खम्भा , तथा पत्थर के तीर मिले है। 
आमरी - यह से बारहसिंघा के साक्ष्य मिले है।  
अलीमुराद - यह हड़प्पा सभ्यता का एकमात्र ग्रामीण स्थल था। 
जदिरदड़ो - यह से स्टेडियम के साक्ष्य मिले है। 
अल्लादिनो - यह स्थल अरब सागर तथा सिंधु नदी के तट पर बसा बन्दरगाही नगर था। 


बलूचिस्तान में खोजे गए स्थल -

नौसारो - यह से सिंदूर के साक्ष्य मिले है। 
बालाकोट - यह से सीप  उद्योग के साक्ष्य मिले  है। 
सोत्काकोह - शादीकौर नदी के तट पर बसा था। 
सुतकागेंडोर 

हड़प्पा कालीन आर्थिक जीवन


हड़प्पा कालीन आर्थिक जीवन -


  1. हड़प्पा कालीन आर्थिक जीवन को निम्न भागो के आधार पर व्यक्त किया जाता है -
  2. कृषि
  3. पशुपालन
  4. शिल्प व् उद्योग धंधे
  5. मुहरे
  6. लिपि
  7. व्यापार तथा वाणिज्य


कृषि -


  • सिंधु घाटी सभ्यता के लोग सिंधु व इसकी सहायक नदियों के किनारे  उपजाऊ भूमि में खेती करते थे।
  • फसल - ये लोग नवंबर में  बोकर मार्च में काटते थे। अर्थात रवी की फसल उगाते थे।
  • मुख्य फसले - इनकी मुख्य नौ फसले थी - १. गेंहू  २. जौ  ३. कपास   ४. तरबूज  ५. मटर   ६. राइ   ७. सरसो  ८. खरबूजा   ९. तिल
  • रागी , ज्वार तथा कोदी के साक्ष्य गुजरात के रोजदी से प्राप्त हुए है।
  • बाजरे के साक्ष्य लोथल से प्राप्त हुए है।


पशुपालन -

  • महत्व - पशुपालन का विशेष प्रयोग कृषि ,  परिवहन, क्रय -विक्रय, तथा भोजन आदि के लिए करते थे।
  • जनकरी - गाय , बैल, भैंस , बकरी , कुत्ता , बिल्ली, ऊंट , हाथी , व्याघ्र , बारहसिंघा , आदि।
  • गाय , ऊंट तथा घोडा का अंकन मुहरों नहीं मिलता है।
  • घोडा के साक्ष्य तीन स्थानों से प्राप्त हुए है। -
  • १. सुरकोतड़ा - यह से घोड़े का कंकाल प्राप्त हुआ है।
  • २. लोथल -  घोडे का जबड़ा प्राप्त हुआ है।
  • ३. रानागुंडई -  यह से दन्त प्राप्त हुए है।
  • प्रमुख पशु - इस सभ्यता के लोगो का प्रमुख पशु एक सींघ वाला बैल था।
  • सिंह का अंकन सिंधु सभ्यता की मुहर में नहीं जबकि मेसोपोटामिया की सभ्यता में है।


उद्योग -


  • कपड़ा उद्योग - यह हड़प्पा वासियो का प्रमुख उद्योग था।
  • मृदभांड (बर्तन) - ये लोग मिटटी तथा धातु से बने बर्तन का निर्माण करते थे। इनके बर्तन चाक तथा हाथ दोनों से निर्मित होते थे। बर्तनो की रंगाई में लाल रंग का प्रयोग किया जाता था। कुछ बर्तनो पर काले रंग की पुष्पकर ज्यामितीय भी प्राप्त हुई है।
  • मनका उद्योग - मिटटी , गोमद , फिरोजा , लाल पत्थर , चांदी तथा सोने के बने मनको का प्रयोग  होता था। मनके बनाने के कारखाने के साक्ष्य लोथल तथा चन्हूदड़ो से मिले है।
  • सीप उद्योग - लाथल तथा बालकोट से सीप उद्योग के साक्ष्य मिले है।


व्यापर एवं वाणिज्य -


  • कश्मीर ,  कोलार , काठियावाड़ तथा बलूचिस्तान से अंतराज्यीय व्यापर था।
  • सुमेरिया (मेसोपोटामिया) , मिस्र , फारस खाड़ी , तथा अफगानिस्तान एवं ईरान क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय व्यापर के साक्ष्य मिलते है।
  • सुमेरिया से मुहरे , संस्कृति , तथा कला का आदान - प्रदान  साक्ष्य प्राप्त हुए है जो की विकसित व्यापर का उदहारण है।
  • गुजरात से मिस्र की ममी का मॉडल प्राप्त हुआ है।  जो की इस सभ्यता के मिस्र से व्यापारिक सम्बन्धो को दर्शाता है किन्तु बीच अल्प  व्यापर के साक्ष्य मिले है।
  • फारस की खाड़ी से प्राप्त सारगोन का अभिलेख जिसमे की बहरीन, बलूचिस्तान , तथा सिंधु घाटी के नामो का जिक्र आया है जो की हड़प्पा सभ्यता के सम्बन्ध को फारस के साथ दर्शाता है।
  • नोट - बहरीन के उपनाम - १. सूर्योदय का देश २. साफ सुथरे नगरों का देश  ३. हाथियों का देश।
  • ये लोग मुख्यतः लाजवर्दी , मणि, चांदी , फ़िरोज़ा तथा सीसा अदि वस्तुए अफगानिस्तान तथा ईरान के आयात करते थे।
  • सीप के बने सामान , हाथी दन्त के बने पैमाने , वस्त्र तथा मनके अन्य देशो को निर्यात करते थे।


मुहरे -


  • 2500मुहरे हड़प्पा सभ्यता से प्राप्त हुई है।  जिनमे से 1200 से अधिक मोहेंजोदड़ो से  प्राप्त हुई है। मोहेंजोदड़ो से प्राप्त सभी मुहरे वर्गाकार है। 
  • सर्वाधिक अभिलेखीय मुहरे हड़प्पा  से प्राप्त हुई है। 
  • ये मुख्यतः सेलखड़ी से बनी थी। साथ ही कांचली , मिटटी , गोमद से बनी मुहरे भी प्राप्त हुई है। 
  • आयताकार, वर्गाकार , तथा बेलनाकार मुहरे प्राप्त हुई है। सबसे अधिक वर्गाकार मुहरे प्राप्त हुई है। 
  • ये मुहरे लिपिक है जिनमे पशुछाप , पछि छाप , तथा पेड़ पौधों आदि की छाप का प्रयोग किया गया है। 


लिपि -


  • हड़प्पा सभ्यता से प्राप्त लिपि को पढ़ा नहीं जा सका है। 
  • इस लिपि की सर्वप्रथम जानकारी सं 1853 में हुई। 
  • इसकी संपूर्ण जानकारी सं 1923 में तक प्राप्त हो सकी। 
  • इस लिपि में कुल 64 चिन्ह है। 
  • चित्राक्षर - 250 से 400 अक्षर है।  अंग्रेजी के U आकर का सर्वाधिक प्रयोग किया गया है। मछली चित्र का भी प्रयोग किया गया है। 
  • इस लिपि को गोत्रिका या ब्रोस्टोफेनडम कहते है। 
  • इस लिपि को दाएं से बाएं , फिर बाएं से दाएं , फिर दाएं से बाये इस प्रकार लिखा जाता है। 


परिवहन -


  • जलमार्ग - जलमार्ग के लिए प्रमुख बंदरगाह थे लोथल , मेघम , भागतराव ,तथा बालाकोट। 
  • स्थलमार्ग - ये लोग स्थलमार्ग में मुख्यतः ताम्बे की इक्का गाड़ी तथा बैलगाड़ी का  प्रयोग करते थे। 

हड़प्पा कालीन समाज


हड़प्पा कालीन समाज -


हड़प्पा कालीन नगर नियोजन -


  • घरों के दरवाजे सड़कों पर नहीं बल्कि गलियों में खुलते थे। किंतु इसका अपवाद लोथल में देखने को मिलता है।
  • हड़प्पा कालीन नगर आयताकार या वर्गाकार थे।
  • प्रत्येक घर में कुआं स्नानागार और रसोईघर होता था।
  • घर दो से तीन मंजिल तक होते थे।


हड़प्पा कालीन सामाजिक पक्ष -

हड़प्पा कालीन सामाजिक पक्ष को जानने के लिए हम विषय निम्नलिखित पांच भागों में विभाजित करके जानने का प्रयास करेंगे। -
समाज
स्त्रियों की दशा
खानपान
वेशभूषा
मनोरंजन


समाज -

हड़प्पा कालीन समाज निम्नलिखित तीन वर्गों में विभाजित था।
विशिष्ट वर्ग - इस वर्ग के अंतर्गत पुरोहित प्रशासनिक अधिकारी आदि को सम्मिलित किया जाता था।
मध्यमवर्ग  - इस वर्ग के अंतर्गत व्यापारी कारीगर शिक्षक तथा किसानों को सम्मिलित किया जाता था।
कमजोर वर्ग - इस वर्ग के अंतर्गत मजदूरों तथा दासों को सम्मिलित किया जाता था।

हड़प्पा कालीन समाज में निम्नलिखित चार प्रजातियां पाए जाने के संदेश मिलते हैं -
अल्पाइन
भूमध्यसागरीय (जो कि सबसे अधिक थे)
प्रोटो आस्ट्रेलायड
मंगोलायड

स्त्रियों की दशा -


  • हड़प्पाकालीन समाज मातृ प्रधान समाज था यहां पर शक्ति तथा उर्वरता के रूप में स्त्री की पूजा की जाती थी ।
  • हड़प्पा कालीन सभ्यता से सती प्रथा के भी साक्ष्य मिले हैं।
  • लोथल से 3 युग्मित समाधियां प्राप्त हुई हैं।
  • कालीबंगा से कई युग्मित समाधियां प्राप्त हुई हैं।


खानपान -

हड़प्पाकालीन लोग शाकाहारी तथा मांसाहारी दोनों ही थे।

वेशभूषा -


  • हड़प्पा कालीन लोग सूती तथा ऊनी दोनों प्रकार के वस्त्रों का प्रयोग करते थे।
  • सूती शॉल के साक्ष्य मोहनजोदड़ो से प्राप्त हुए हैं।
  • हड़प्पाकालीन लोग मुख्यतः सोना, चांदी ,मणिक
  •  हाथी दांत, शंख ,सीप, तथा मिट्टी के आभूषणों का प्रयोग करते थे।


मनोरंजन के साधन -

हड़प्पा कालीन लोग मुख्यतः शिकार खेलना, मछली पकड़ना,, पशु पक्षियों को लड़ाना, चौपाल और पासा खेलना, ढोल मंजीरे बजाना, तथा नृत्य व गीत आदि से अपना मनोरंजन करते थे।

हड़प्पा कालीन धार्मिक जीवन -


  • हड़प्पा कालीन लोग मातृदेवी की पूजा करते थे।
  • यह लोग पशुपति देव की भी पूजा करते थे। जिसके साक्ष्य मोहनजोदड़ो की मुहरों में मिलते हैं।
  • इस सभ्यता के लोग वृषभ पूजा भी करते थे। जिसमें वे मुख्यतः एक सींग वाला बैल की पूजा विशेष रुप से करते थे इसके साक्ष्य मोहनजोदड़ो से प्राप्त हुए हैं।
  • यहां के लोग जल पूजा, अग्नि पूजा, वृक्ष पूजा, पशु पूजा, तथा नाग पूजा भी करते थे।


हड़प्पाकालीन सभ्यता का पतन -


  • इस सभ्यता का पतन कई वर्षों के निरंतर विकसित होती गई संस्कृति विकास के क्रम में पाया जाता है। जैसे की नगरी विकास के लक्षणों का धीरे-धीरे अंत होने लगा।
  • चौड़ी सड़कें तंग गलियों में बदल गई।
  • पूर्व के नियोजित घरों का स्थान बेतरतीब घरों ने ले लिया।
  • घर के अंदर के बड़े आंगन छोटे-छोटे आंगनों में बदल गए तथा आंगन में पतली दीवारें उठ गई।
  • पक्की ईंटों का प्रयोग के स्थान पर पुरानी ईंटों का प्रयोग होने लगा।
  • बहावलपुर क्षेत्र में 174 बस्तियों में से 50 बस्तियां रह गई।
  • हड़प्पा मोहनजोदड़ो तथा लोथल से बस्तियां पूर्वी क्षेत्रों( उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात) मैं जाने लगी।
  • मेसोपोटामिया सभ्यता में भी सन 1900 BC के बाद 

भारतीय संविधान CHAPTER - 4 / संविधान की उद्देशिका अथवा प्रस्तावना



भारतीय संविधान की उद्देशिका अथवा प्रस्तावना 

नेहरू द्वारा प्रस्तुत उद्देश्य संकल्प में जो आदर्श प्रस्तुत किया गया उन्हें ही संविधान की उद्देशिका में शामिल किया गया है। संविधान के 42वे संशोधन (1976) द्वारा यथा संशोधित यह उद्देशिका निम्न प्रकार है। 

"हम भारत के लोग , भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्वसम्पन्न , समाजवादी , पंथनिरपेक्ष , लोकतंत्रात्मक , गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिको को ;  सामाजिक , आर्थिक और राजनैतिक न्याय, विचार ,  अभिव्यक्ति , विश्वास , धर्म और उपासना की स्वतंत्रता प्रतिष्ठा तथा अवसर की समानता प्राप्त करने के लिए तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखण्डता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर 1949 ई० (मिति मार्ग शीर्ष शुक्ल सप्तमी सम्वत दो हज़ार छह विक्रम) को एतद द्वारा इस संविधान को अंगीकृत , अधिनियमित और आत्मार्पित करते है। ''

संविधान की मुख्य बाते -

  • प्रस्तावना संविधान का आमुख / मुख्य पृष्ठ है जो की संविधान की प्रकृति का परिचय देता है। 
  • प्रस्तावना के अनुसार संविधान के अधीन समस्त शक्तियों का केंद्रबिंदु अथवा स्त्रोत भारत के नागरिक है। 
  • संविधान के 42वे संशोधन (1976) द्वारा इसमें समाजवाद , पंथनिरपेक्ष , तथा अखण्डता शब्द जोड़े गए। 
  • प्रस्तावना में समाजवाद रखने का मामला K.T. शाह ने उठाया। 



प्रस्तावना के सम्बन्ध में विचरको के मत -



  • प्रस्तावना देश की राजनीतिक कुंडली है।  - K.M. मुंशी 
  • प्रस्तावना संविधान की आत्मा है।  - भार्गव 
  • प्रस्तावना संविधान की कुंजी है।  - बार्कर 

NOTE - सामान्य दशा में प्रस्तावना कको ही संविधान की आत्मा मन जाता है।  किन्तु B.R. अम्बेडकर ने अनुच्छेद - 32 को संविधान की आत्मा कहा है। 


व्यक्तियों के लिए प्रस्तावना की मूल्यात्मक अवधारणा -



  • स्वतंत्रता - विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास , धर्म , उपासना की स्वंत्रता।  
  • समानता - प्रतिष्ठा तथा अवसर की समानता। 
  • न्याय - सामाजिक, आर्थिक , तथा राजनैतिक न्याय। 
  • बंधुत्व - व्यक्ति की गरिमा तथा एकता सुनिश्चित करता है। 
  • अत; यह एक आदर्श व्यवस्था है जो की संविधान का दर्शन भी है। 



राज्य के लिए अवधारणा -



  • सत्ता का ज्ञान - जनता सर्वोपरि है। 
  • राष्ट्र की प्रकृति - संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्र , तथा गणराज्य। 
  • राज्य का उद्देश्य - जन कल्याण की भावना। 



संविधान से सम्बंधित प्रमुख तिथियां  - 



  • संविधान को स्वीकार किया गया - 26 Nov. 1949
  • संविधान को लागू किया गया - 26 Jan. 1950 
  • संविधान सभा की पहली बैठक - 9 Dec. 1946 (सच्चिदानन्द सिन्हा को अस्थाई अध्यक्ष चुना गया।)
  • संविधान सभा की दूसरी बैठक - 11 Dec. 1946 (राजेंद्र प्रसाद को स्थाई अध्यक्ष चुना गया।)
  • संविधान सभा की तीसरी बैठक - 13 Dec. 1946 (उद्देश्य प्रस्ताव रखा गया)
  • संविधान सभा में प्रस्ताव पारित होने की तिथि - 22 Jan. 1947



प्रस्तावना संविधान का अंग है या नहीं- 

1. बेरुवारी यूनियन वाद (1960)- इसके निर्णय के अनुसार प्रस्तावना को संविधान का अंग नहीं माना गया।  

2. केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973)- इसके निर्णय के अनुसार प्रस्तावना को संविधान का अंग माना गया। 
3. S.R. बोम्बाई वाद (1994)- इसके निर्णय के अनुसार प्रस्तावना को संविधान का अंग माना गया। 

प्रस्तावना में संशोधन सम्बन्धी वाद - 

अपीलार्थी पक्ष का मानना था की - प्रस्तावना संविधान की आत्मा है अत: संशोधन से संविधान की प्रकृति नष्ट हो जायगी। 
सरकार पक्ष का मानना था की - प्रस्तावना संविधान का अंग है अत: संशोधन कर सकते है। 
न्यायलय का निर्णय - प्रस्तावना में संशोधन हो सकता है किन्तु मूल ढांचा नष्ट नहीं होना चाहिए। 

विश्लेषण -

 महत्व - 


  • प्रस्तावना नागरिको को स्वंत्रता का आश्वासन देता है। 
  • प्रतिष्ठा तथा अवसर की समानता की बात करता है। 
  • प्रस्तावना संविधान का दर्शन है। 
  • यह सरकार का मार्गदर्शक है। 
  • सामाजिक , राजनैतिक एवं आर्थिक आधार पर परिभाषित व्यक्ति एवं सरकार के सम्बन्ध को मजबूत करता है। 

समस्या -



  • राजनैतिक पार्टिया अपने निजी स्वार्थ हेतु संशोधन करती है। 
  • प्रस्तावना का कोई क़ानूनी महत्व नहीं है। 
  • विधायिका तथा कार्यपालिका में सम्बन्ध कठोर होते है।  

Monday, September 3, 2018

सिंधु घाटी सभ्यता - 2 / उत्पत्ति, नगर

                                  

 उत्पत्ति -

सिंधु घाटी सभ्यता की उत्पत्ति एवं विकास को लेकर विद्वानों का अलग अलग मत है- 
१. विदेशी उत्पत्ति का मत 
२. देशी उत्पत्ति का मत 


विदेशी उत्पत्ति का मत - इस मत के अनुसार हड़प्पा सभ्यता की उत्पत्ति मेसोपोटामिया की सभ्यता के विस्तार स्वरुप हुई थी। इस मत के समर्थन करने वाले विद्वानों में जॉन मार्शल , क्रेमर , H.D. सांकलिया प्रमुख है।KNOW MORE  



देशी उत्पत्ति का मत (क्रमिक विकास) - इस मत को मानने वालो में भी  अलग अलग मत है - 
१. ईरानी - बलूचिस्तान सभ्यता का विकास 
इस मत के प्रमुख पक्षधर विद्वान फेयर सर्विसव तथा रोमिला थापर है।  
२. सोथी संस्कृति का विकास - 
इस मत के प्रमुख पक्षधर विद्वानों में अम्लानन्द घोष , आल्चिन दम्पति तथा D.P. अग्रवाल है। 
नोट - साथी संस्कृति की खोज सं 1953 में अमलानंद घोष ने राजस्थान में की थी। 

ड़प्पा कालीन नगर
 सिंधु घाटी सभ्यता को प्रथम नगरीय सभ्यता कहते है तथापि इसमें खोजे गए 1400 से अधिक स्थलों में केवल 7 स्थलों को ही नगर की संज्ञा दी गयी है।  जो  निम्न है - 

१. हड़प्पा 

२. मोहनजोदड़ो 

३. लोथल 

४. धौलावीरा 

५. कालीबंगा 

६. चन्हूदड़ो 

७. बनवाली 


नोट - सभी नगर दो भागो में बटे थे - 
. पूर्वी टीला - नगर 
२. पश्चिमी टीला - यह दुर्ग या गढ़ी था जहां उच्च वर्ग के लोग रहते थे।  KNOW MORE


हड़प्पा - 



  • यह नगर पकिस्तान के पंजाब प्रान्त के मांटगुमरी जिला (आधुनिक शाहीवाल) में स्थित था।  
  • यह रावी नदी के बाये तट पर बसा था।  
  • पश्चिमी टीला दुर्ग से घिरा था।  जिसे AB टीला नाम दिया गया  है।  
  • AB टीले के उत्तर में F टीला पाया गया।  जिसमे अन्नागार (दी पंक्तियों में 6+6=12) , 15 श्रमिक आवास , 18 वृत्ताकार चबूतरे मिले है। 
  • गेहूं व जौ के दाने के साक्ष्य मिले है। 
  • AB टीला से लकड़ी की कब्र मिली है जिसे R-37 नाम दिया गया है। 
  • इस नगर के खोज से सम्बंधित व्यक्ति -
  1.  निदेशक - जॉन मार्शल 
  2. उत्खननकर्ता - दयाराम साहनी 
  3. सहायक - माधवस्वरूप वत्स 
  • यह नगर सन 1921 में खोजा गया। 
  • नगर क्षेत्र से ताम्बे की इक्कागाड़ी तथा सर्वाधिक अभिलेखी मुहरों के साक्ष्य मिले है। 

मोहनजोदड़ो -


  • नगर पाकिस्तान के सिंध प्रान्त के लरकाना जिले में पाया गया।  
  • यह सिंधु नदी के दाएं तट पर बसा है। 
  • 1922 में राखालदास बनर्जी द्वारा इसे उत्खनित (खोजा) किया गया। 
  • जॉन मार्शल के अनुसार यह नगर सात बार बाढ़ के डूबा था।  
  • KUR कैनेडी के अनुसार भीषण मलेरिया के इस नगर का पतन हुआ। 
  • यह नगर इस सभ्यता का सर्वाधिक जनसँख्या वाला नगर था जिसकी कुल आबादी लगभग 35 से 40  हज़ार थी। KNOW MORE
  • इसके अन्य उपनाम इस प्रकार है - 
  1. मृतकों का टीला 
  2. प्रेतों का नगर 
  3. सिंधु का बाग 
  4. स्तूप टीला 
  • हड़प्पा तथा मोहनजोदड़ो को जुड़वाँ राजधानी कहा गया है। 
  • क्षेत्रफल की दृष्टि से यह नगर इस सभ्यता का दूसरा सबसे बड़ा नगर था।
  • पश्चिमी टीले से सभा भवन, पुरोहित आवास , महाविद्यालय तथा घर आदि के साक्ष्य मिले है 
  • प्रत्येक घर से कुंआ , स्नानागार , 3 से 4 कमरे , तथा दोकमंजिला घर प्राप्त हुए है।  
  • पश्चिमी टीले में अन्नागार , वृहत स्नानागार (जॉन मार्शल के अनुसार तत्कालीन विश्व का सबसे बड़ा आश्चर्य) प्राप्त हुआ है। 
  • सबसे बड़ी इमरती संरचना अन्नागार प्राप्त हुई है। 
  • पूर्वी टीले से प्राप्त कुछ विशेष साक्ष्य -
  1. 10 इंच की कांस्यमूर्ति प्रोटोस्टाइलट प्रजाति की। 
  2. 1200 मुहरे (सर्वाधिक) वर्गाकार प्राप्त हुई है।  
  3. सूती कपडा चाकू के साथ। 
  4. एक 10 मीटर चौड़ा राजपथ मार्ग पाया गया। 
  5. पक्की सड़को का एक मात्र स्थान पाया गया।  




 लोथल 



  •  यह नगर भारत के गुजरात में अहमदाबाद जिले में पाया गया है। 
  • यह भोगवा नदी के तट पर खंभात की खाड़ी के समीप पाया गया है। 
  • इसकी खोज SR राव ने सन 1954  की। 
  • इसे लघु हड़प्पा या लघु मोहनजोदड़ो भी कहते है। 
  • यहां से 20 समाधियां पायी गयी है। इसे मुर्दो का नगर भी कहा जाता है। 
  • 3 युग्मित (स्त्री + पुरुष) समाधियां पायी गयी है। जो की सती प्रथा का प्रतीक है।  
  • दोनो टीले एक ही प्राचीर से घिरे थे। ( सुरकोतड़ा में भी) 
  • रंगाई कुंड , आटा पीसने की चक्की , मनका बनाने के कारखाने आदि के साक्ष्य प्राप्त हुए है। 
  • अग्निकुंड के साक्ष्य प्राप्त हुए है।  
  • धान तथा बाजरा के साक्ष्य।
  • ममी का मॉडल प्राप्त हुआ है। KNOW MORE
  • गोरिल्ला व बारहसिंहा के छाप की मुहरे प्राप्त हुई है। 
  • दो मुँह वाले राक्षस छाप की मुहरे प्राप्त हुई जो की फारस से सम्बंधित है। 
  • गोड़ीवाड़ा बंदरगाह प्राप्त हुआ। 
  • हाथी दन्त का पैमाना प्राप्त हुआ है। 


Tuesday, July 31, 2018

भारतीय संविधान में वर्णित अनुसूचियाँ


भारतीय संविधान में वर्णित अनुसूचियाँ


1. प्रथम अनुसूची - राज्य

   इसमें भारतीय संघ के सभी राज्यों (29 राज्य ) एवं संघ शासित (सात ) क्षेत्रो का उल्लेख है।
नोट - संविधान के 69वें संशोधन के द्वारा दिल्ली को राष्ट्रिय राजधानी क्षेत्र (NCR) का दर्जा प्राप्त है।

2. द्वितीय अनुसूची - वेतन

   इसमें भारतीय राज्य व्यवस्था के विभिन्न पदाधिकारियों को प्राप्त होने वाले वेतन , भत्ते , और पेंशन अदि का उल्लेख है।

3. तृतीय अनुसूची - शपथ

   इसमें विभिन्न पदाधिकारियों द्वारा पद ग्रहण करते समय ली जाने वाली शपथ का उल्लेख है।
नोट - इसमें राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति की शपथ का उल्लेख नहीं है।

4. चौथी अनुसूची - राज्य सभा में सीटों का आवंटन

   इसमें विभिन्न राज्यों तथा संघीय क्षेत्रो की राज्य सभा में प्रतिनिधित्व का विवरण दिया गया है।

5. पांचवी अनुसूची - अनुसूचित क्षेत्रो और जनजातियों के प्रशासनिक कार्य

6. छःठी अनुसूची - इसमें असम , मेघालय और त्रिपुरा राज्यों के जनजाति क्षेत्रो के प्रशासन के बारे में प्रावधान है।

7. सातवीं अनुसूची - त्रिसूची

   इसमें केंद्र एवं राज्यों के बीच शक्तियों के बंटवारे के बारे में बताया गया है। इसके अंतर्गत तीन सुचिया है -
१.  संघ सूची - इसमें 100 विषय है  तथा कानून बनाने का अधिकार संघ को है। संविधान लागू होने के समय 97 विषय थे। 
२. राज्य सूची - इसमें 61 विषय है तथा कानून बनाने का अधिकार राज्यों को है। राष्ट्रिय हित से सम्बन्धित होने पर केंद्र सरकार भी कानून बना सकती है।  संविधान लागू होने के समय 66 विषय थे।
३. समवर्ती सूची - इसमें 52 विषय  है तथा कानून बनाने का अधिकार संघ तथा राज्य दोनों को है। संविधान लागू होने के समय 47 विषय थे।व्यवहारतः समवर्ती सूचि पर भी कानून संघ ही बनता है।

 नोट - समवर्ती सूचीय का प्रावधान जम्मू कश्मीर राज्य के संबंध में नहीं है। 


8. आठवीं अनुसूची - राजभाषाओ का उल्लेख

  इसमें भारत की 22 भाषाओ का उल्लेख किया गया है। मूल रूप से 8वी अनुसूची में 14 भाषाएँ थीं।
१. संस्कृत
२. हिंदी
३. असमिया
४. उर्दू
५. ओड़िया
६. कन्नड़
७. कश्मीरी
८. गुजरती
९. तमिल
१०. तेलुगु
११. पंजाबी
१२. बंगाली
१३. मराठी
१४. मलयालम
१५. सिंधी      { 21वे संविधान संशोधन (1967)}
१६. कोंकणी    {71 वा संविधान संशोधन (1992)}
१७. मणिपुरी    {71 वा संविधान संशोधन (1992)}
१८. नेपाली       {71 वा संविधान संशोधन (1992)}
१९. मैथली     { 92वा संविधान संशोधन (2003)}
२०. संथाली     { 92वा संविधान संशोधन (2003)}
२१. डोगरी       { 92वा संविधान संशोधन (2003)}
२२. बोडो      { 92वा संविधान संशोधन (2003)}

9. नौवीं अनुसूची - राज्य द्वारा संपत्ति का अधिग्रहण। 

 यह अनुसूची संविधान के प्रथम संशोधन के द्वारा सं 1951 में जोड़ी गयी थी।  प्रारम्भ में इसमें रखे विषयो पर न्यायिक पुनरावलोकन नहीं किया जा सकता था।  किन्तु सुप्रीम कोर्ट के नियम - 2007 द्वारा 1973 के बाद के विषयो पर सुप्रीम कोर्ट पुनरावलोकन कर सकेगा।  

10. दसवीं अनुसूची - दल बदल कानून 

यह अनुसूची संविधान में 52 वे संविधान संशोधन -1985 में जोड़ी गयी। 

11. ग्यारहवीं अनुसूची - ग्राम पंचायत 

यह अनुसूची संविधान में 73 वे संविधान सं 1992 द्वारा जोड़ी गयी। 

12. बारहवीं अनुसूची - नगर पंचायत 

यह अनुसूची संविधान में 74वे संशोधन द्वारा सं 1992 में जोड़ी गयी।  




Friday, July 13, 2018

भारतीय संविधान chapter --3/ संशोधन की प्रक्रिया




संविधान संशोधन की प्रक्रिया 


संशोधन के आधार पर संविधान दो प्रकार का होता है 

  1. लचीला संविधान - जिस देश के संविधान में कानून बनाने की प्रक्रिया और संशोधन की प्रक्रिया एक समान हो। 
  2. कठोर संविधान - जिस देश के संविधान में कानून बनाने की प्रक्रिया और संशोधन की प्रक्रिया एक समान न हो। 


  • संशोधन की प्रक्रिया के आधार पर भारत का संविधान मिश्रित (कठोर तथा लचीला ) है। 
  •  संविधान में संशोधन करने के लिए संशोधन विधेयक को संसद के किसी एक सदन ( लोकसभा या राज्यसभा ) में प्रस्तावित करना पड़ता है।  तत्पश्चात विधेयक को संसद के दूसरे सदन में मंजूरी प्राप्त करने के लिए भेजा जाता है। तथा दोनों सदनों में मंजूरी मिल जाने के बाद विधेयक को राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है। तथा राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद संशोधन की प्रक्रिया पूर्ण हो जाती है।  
  • संविधान में संशोधन के लिये तीन प्रकार के  बहुमत की प्रक्रिया का वर्णन है।  

1. साधारण बहुमत द्वारा -

प्रक्रिया - संशोधन विधेयक पास करने के लिए प्रत्येक सदन में उपस्थित सांसदों की न्यूनतम संख्या सदन में कुल आवंटित सीटों के आधे से एक अधिक होनी चाहिए तथा उपस्थित कुल सदस्यों की संख्या के आधे से एक अधिक सदस्यों का समर्थन प्राप्त होना चाहिए।  

अधिकार क्षेत्र - इस बहुमत द्वारा सामान्य प्रावधानों में परिवर्तन किया जा सकता है।  जैसे - नागरिकता , संसदीय विशेषाधिकार , वेतन , नए राज्य निर्माण आदि। 


2. विशेष बहुमत द्वारा -

प्रक्रिया - संशोधन विधेयक पास करने के लिए प्रत्येक सदन में उपस्थित सांसदों की न्यूनतम संख्या सदन में कुल आवंटित सीटों की दो - तिहाई होनी चाहिए तथा उपस्थित सांसदो की कुल संख्या का दो - तिहाई का समर्थन मिलना चाहिए।  

अधिकार क्षेत्र - सर्वाधिक संशोधन इसी प्रक्रिया के द्वारा होता है। जैसे - मूल अधिकार , मौलिक कर्त्तव्य , राज्य  के निति निदेशक तत्त्व, तथा आपातकाल आदि।  
नोट - सुप्रीम कोर्ट , हाई कोर्ट के जज , तथा महालेखापरीक्षक ( CAG ) को इसी प्रक्रिया के द्वारा हटाया जाता है।   


3. विशेष बहुमत तथा 1/2 राज्यों की सहमति द्वारा -

प्रक्रिया - इस प्रक्रिया में संसद में विशेष बहुमत होने के साथ साथ कुल राज्यों के आधे राज्यों का समर्थंन प्राप्त होना चाहिए।  

अधिकार क्षेत्र - केंद्र तथा राज्य दोनों से सम्बंधित किसी मामले में परिवर्तन, जैसे - 7वीं अनुसूची , राष्ट्रपति निर्वाचन प्रक्रिया , संशोधान की प्रक्रिया तथा संसद में नए राज्य के प्रतिनिधित्व आदि से सम्बंधित मामलो में संशोधन करने के लिए इस प्रक्रिया का अनुसरण किया जाता है। 

  • संविधान में वर्णित अन्य प्रकार के बहुमत -


1. प्रभारी बहुमत - 

 प्रक्रिया - संसद में कुल आवंटित सीटों का 1/10 भाग की उपस्थिति होनी चाहिए।  इस संख्या को कोरम भी कहते है।  
 अधिकार क्षेत्र - यह संख्या किसी भी सदन की कार्यवाही  के लिये अनिवार्य है।  तथा कोरम में बहुमत के द्वारा लोकसभा स्पीकर को हटाया जा सकता है।  

2. बहुमत 1/2 - इस बहुमत का प्रयोग सरकार बनाने में किया जाता है।  
3. FPPS ( first pass post system )- इस प्रक्रिया का प्रयोग साधारण चुनावो में किया जाता है।  जैसे -किसी विधानसभा क्षेत्र में कोई उम्मीदवार अन्य सभी उम्मीदवारों से अधिक वोट पता है जबकि कुल वोटो का 50% से कम पाता है, जीता हुआ घोषित किया जाता है। 


  •  अनुच्छेद - 108 - राष्ट्रपति के बुलाने पर ही लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक होगी।  


  •  संशोधन की सामान्य प्रक्रिया - सशोधन का प्रारम्भ विधेयक बनाकर ही होगा।  



  • संसद किसी भी भाग या अनुच्छेद में संशोधन कर  है।  किन्तु संविधान का मूल ढांचा नष्ट नहीं होना चाहिए।  
  • संशोधन केवल केंद्र सरकार  ही कर  सकती है। 
  • भारत में संशोधन के लिए जनमत संग्रह का प्रावधान नहीं है। 



विश्लेषण -


महत्व -

  •  संविधान को नए जीवन से जोड़ने हेतु संशोधन आवश्यक है।  
  •  संशोधन आधुनिकीकरण  की प्रक्रिया में सहायक है।  
  • इससे संविधान जनता की इच्छा का प्रतिबिम्ब बनता है।  


समस्या -

  • राजनैतिक पार्टिया अपने दलीय स्वार्थ हेतु संशोधन करती है।  
  • न्यायपालिका तथा कार्यपालिका में टकराओ की स्थिति उत्पन्न होती है।केंद्र तथा राज्य सरकारों के मध्य सम्बन्ध पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। 
  • कभी कभी किसी संशोधन में राज्यों का समर्थन देरी से मिलता है। 


NOTE - व्यवहारतः समवर्ती सूची पर भी केंद्र सरकार ही कानून बनती है। 


निष्कर्ष - संशोधन के द्वारा संविधान प्रगतिशील बना है। सामाजिक , आर्थिक , न्याय को बढ़ावा मिलता है। लेकिन अभी भी सकारात्मक प्रयासों की आवश्यकता है।  जिससे कि सिद्धांत एवं व्यव्हार में अंतर समाप्त हो। 


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