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Sunday, September 23, 2018

भारतीय संविधान CHAPTER - 5 / भारतीय संविधान के स्त्रोत


भारतीय संविधान के स्त्रोत 
भारत का संविधान अनेक देशो के संविधान से मिलकर बना है जिनका विवरण इस प्रकार है।


भारतीय अथवा देसी स्त्रोत -
भारत सरकार अधिनियम - 1909
भारत सरकार अधिनियम - 1919
नेहरू रिपोर्ट - 1928
साइमन कमीशन - 1930
भारत सरकार अधिनियम - 1935
भारत सरकार अधिनियम - 1935  का  भारत के संविधान में सर्वाधिक प्रभाव पड़ा है। भारतीय संविधान के 350 अनुच्छेद में से लगभग 250 अनुच्छेद ऐसे है जो की भारत सरकार अधिनियम - 1935 से या तो शब्दशः ले लिए गए है अथवा उनमे बहुत थोड़ा परिवर्तन के साथ लिया गया है। इन नियमो में कुछ प्रमुख नियम इस प्रकार है। -
१. अध्यादेश
२. अनुच्छेद -143
३. तदर्थ नियुक्तियां
४. CAG
५. प्रशासनिक ब्यौरे
६. लोक सेवा आयोग
७. राज्यपाल
८. त्रिसूची प्रणाली
९. आपातकाल

विदेशी स्त्रोत -
भारतीय संविधान में जिन देशो का सर्वाधिक प्रभाव पड़ा है वे इस प्रकार है।  -
ब्रिटेन -
१. संसदीय प्रक्रिया
२. विधि निर्माण प्रक्रिया
३. संसदीय विशेषाधिकार
४. एकल नागरिकता
५. विधि का शासन
६. राष्ट्रपति का अभिभाषण
७. बहुमत प्रणाली
८. विधि के समक्ष समानता

संयुक्त राज्य अमेरिका -
१. राष्ट्राध्यक्ष
२. महाभियोग
३. उपराष्ट्रपति
४. मौलिक अधिकार
५. संविधान की सर्वोच्चता
६. नन्यायलय की स्वतंत्रता
७. समुदायिक विकास कार्यक्रम
८. विधि का सामान संरक्षण
HC / SC के न्यायधीशो को हटाने की प्रक्रिया
१०. संविधान संशोधन में राज्यों का अनुमोदन

कनाडा -
१. संघीय शासन व्यवस्था 
२. राज्यों का संघ (ब्रिटिश नार्थ अमेरिका अधिनियम)
३. राज्यपाल , राष्ट्रपति के प्रसाद पर्यन्त पद 
४. राज्य्पाल द्वारा राष्ट्रपति के विचारार्थ विधेयक को प्रारक्षित करने का अधिकार 

ऑस्ट्रेलिया - 
१. समवर्ती सूची 
२. प्रस्तावना में प्रयुक्त भाषा 
३. उद्देशिका में निहित भावनाएं

दक्षिण अफ्रीका -
१. संविधान संशोधन की प्रक्रिया 

आयरलैंड -
१. राष्ट्र के नीतिे निदेशक तत्त्व 
२. राष्ट्रपति का निर्वाचन प्रणाली 
३. राज्यसभा में सदस्यों का मनोनयन 

फ्रांस -
१. गणतांत्रिक व्यवस्था 
२. वयोवृद्ध सदस्यों का उचित स्थान 

सोवियत संघ रूस -
१. मूल कर्तव्य 
२. पंचवर्षीय योजना 

जर्मनी -
१. आपातकाल में मूल अधिकारों का निलंबन 

जापान -
१. विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया 

स्विट्ज़रलैंड -
१. सामाजिक नीतियों के सन्दर्भ में निति निदेशक तत्वों का उपबंध 

Wednesday, September 12, 2018

हडप्पा कालीन नगर - 2


हडप्पा कालीन नगर - 2 

चन्हूदड़ो -


  • यह नगर पाकिस्तान के सिंध प्रान्त में सिंधु नदी के तट पर पाया गया है। 
  • इसकी खोज सं 1931 में NG मजूमदार ने तथा बाद में विस्तृत जानकारी सं 1935 में मैके ने प्राप्त की। 
  • यह नगर झूकर झांगर संस्कृति का अंग था। 
  • यह से कोई भी टीला दुर्गीकृत नहीं पाया गया। 
  • यह मनका बनाने के कारखाने प्राप्त हुए है जो लोथल से बड़े है। 
  •  लिपस्टिक , कंघा , इत्र प्राप्त हुआ है।  जो की सौंदर्य प्रसाधन का प्रतीक है। 
  • यह से वक्राकार ईंटे पायी गयी है जिनमे से एक में कुत्ते द्वारा बिल्ली का पीछा करने के पैरो के निशान प्राप्त है।  

कालीबंगा -


  • राजस्थान के गंगानगर जिले में घघ्घर नदी के तट पर खोजा गया है।  
  • इसको सं 1957 में अमलानंद घोष ने तथा बाद में सं 1960 में BK  खोजा। 
  • कालीबंगा का शाब्दिक अर्थ है - काले रंग की चूड़ियां। 
  • इस नगर के दोनों टीले  अलग अलग रक्षा  प्राचीर से घिरे थे। 
  • यह से प्राप्त एक मिटटी की पट्टिका में एक ओर सव्वंग युक्त देवता और दूसरी ओर मनुष्य और बकरी के चित्र प्राप्त हुए है। 
  • यह से जुते खेत प्राप्त हुए है तथा चना , सरसो आदि के अवशेष प्राप्त हुए है जो की प्राक हड़प्पा कालीन है। 
  • 7 अग्नि कुंड प्राप्त है। 
  • यह के एक बच्चे की खोपड़ी प्राप्त हुई है जिसमे 6 छेद है जो की शल्य चिकित्सा के प्रमाण है। 
  • यह के प्राप्त अन्य वस्तुओ में अलंकृत ईंट , कच्चे घर , ऊँट की हड्डिया। 
  • इस नगर का पतन भूकंप के कारण हुआ था। 

धौलावीरा -



  • यह नगर गुजरात के भचाऊ जिले के खदिर द्वीप के उत्तरी भाग में खोजा  गया है। 
  • यह एक आयताकार नगर है।  
  • इस नगर की खोज सं 1967-68 में जगपति जोशी ने की थी। जबकि इसका उत्खनन सं 1990 में प्रारम्भ हुआ। 
  • यह नगर तीन भागो में विभक्त था।  पूर्वी तथा पश्चिमी टीले के मध्य मध्यमा टीला भी पाया गया है। 
  • इस नगर से स्टेडियम के साक्ष्य भी प्राप्त हुए है।  
  • इस नगर से एक नेम प्लेट भी प्राप्त हुआ जिस पर 10 अक्षर लिखे हुए है।
  • इस नगर के 30%भूभाग पर बड़े तालाब है तथा 2 नहरे भी है जो की जल प्रबंधन की उच्च कोटि की व्यवस्था को दर्शाता है। 
  • यह से प्राप्त जलकुंड शैलकृत स्थापत्य का नमूना है। 


बनवाली -


  • यह नगर हरियाणा के हिसार जिले में खोजै गया है। 
  • इस  नगर की खोज सं 1973 में R.S.बिष्ट ने की थी। 
  • यह से अच्छे किस्म के जौ  के साक्ष्य मिले है। 
  • मिटटी के बने हल की आकृति प्राप्त हुई है। 
  • यह से जल निकास की अव्यवस्थित प्रणाली प्राप्त हुई है। 



भारत में खोजे गए अन्य स्थल 

मांडा - 


  • यह जम्मू कश्मीर में खोजा गया है। 
  • यह इस सभ्यता का सबसे उत्तरी स्थल है। 
  • यह चिनाव नदी के तट पर बसा था। 

रोपड़ (पंजाब)- 


  • स्वतंत्रता के बाद पहला उत्खनित स्थान है। 
  • इसका आधुनिक नाम रूपनगर है। 
  • यह से मालिक के साथ कुत्ते को दफनाने के साक्ष्य मिले है। 


दधेरी (पंजाब)-


  • यह परवर्ती हड़प्पा कालीन स्थल था।  

संघोल (पंजाब)-


  • यह से ताँबे की छेनिया प्राप्त हुई है। 
  • यह से वृत्ताकार अग्निकुंड के साक्ष्य मिले है 

राखीगढ़ी (हरियाणा)- 


  • भारत में खोजा गया हड़प्पा काल का सबसे बड़ा स्थल है।  

कुणाल (हरियणा)- 


  • यह से चांदी के दो मुकुट मिले है। 

सनौली (बागपत , उत्तर प्रदेश)-

  • यह से 125 समाधिया मिली है। 
  • यह से जानवरो की हड्डिया मिली है। 

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से खोजे गए स्थल -

बड़ागाव  
हुलास 
अम्बाखेड़ा 
सकतपुर - यह सं 2017 में खोजा गया नवीनतम स्थल है। 

उत्तर प्रदेश के मेरठ से खोजे गए स्थल - 

आलमगीरपुर - यह हिंडन नदी के तट पर बसा था। तथा इस सभ्यता का सबसे पूर्वी स्थल है। 
हस्तिनापुर 
भगवानपुरा 

सुरकोतड़ा (गुजरात)-

  • यह कच्छ की खाड़ी  के क्षेत्र में खोजा गया है। 
  • यह से घोड़े का कंकाल प्राप्त हुआ है। 
  • इस नगर के दोनों टीले एक ही प्राचीर से घिरे हुए थे। 
  • इसका पतन भूकंप से हुआ। 

रंगपुर (गुजरात)-

  • यह स्थल अहमदाबाद के काठियावाड़ क्षेत्र (सौराष्ट्र) में खोजा  गया है। 
  • यह भादर नदी के तट पर बसा था। 
  • यह से धान की भूसी प्राप्त हुई है। 

दैमाबाद (महाराष्ट्र)-


  • यह सबसे दक्षिणी स्थल है। 
  • यह स्थल नगर अहमदनगर जिले में गोदावरी की सहायक प्रवरा नदी के तट पर बसा था। 



पाकिस्तान में खोजे गए स्थल -

गनेरीवाला (पंजाब)-


  • यह क्षेत्रफल की दृष्टि से इस सभ्यता का सबसे बड़ा स्थल था। 

सिन्ध प्रान्त में खोजे गए स्थल -

कोटदीजी - यह से अलंकृत खम्भा , तथा पत्थर के तीर मिले है। 
आमरी - यह से बारहसिंघा के साक्ष्य मिले है।  
अलीमुराद - यह हड़प्पा सभ्यता का एकमात्र ग्रामीण स्थल था। 
जदिरदड़ो - यह से स्टेडियम के साक्ष्य मिले है। 
अल्लादिनो - यह स्थल अरब सागर तथा सिंधु नदी के तट पर बसा बन्दरगाही नगर था। 


बलूचिस्तान में खोजे गए स्थल -

नौसारो - यह से सिंदूर के साक्ष्य मिले है। 
बालाकोट - यह से सीप  उद्योग के साक्ष्य मिले  है। 
सोत्काकोह - शादीकौर नदी के तट पर बसा था। 
सुतकागेंडोर 

हड़प्पा कालीन समाज


हड़प्पा कालीन समाज -


हड़प्पा कालीन नगर नियोजन -


  • घरों के दरवाजे सड़कों पर नहीं बल्कि गलियों में खुलते थे। किंतु इसका अपवाद लोथल में देखने को मिलता है।
  • हड़प्पा कालीन नगर आयताकार या वर्गाकार थे।
  • प्रत्येक घर में कुआं स्नानागार और रसोईघर होता था।
  • घर दो से तीन मंजिल तक होते थे।


हड़प्पा कालीन सामाजिक पक्ष -

हड़प्पा कालीन सामाजिक पक्ष को जानने के लिए हम विषय निम्नलिखित पांच भागों में विभाजित करके जानने का प्रयास करेंगे। -
समाज
स्त्रियों की दशा
खानपान
वेशभूषा
मनोरंजन


समाज -

हड़प्पा कालीन समाज निम्नलिखित तीन वर्गों में विभाजित था।
विशिष्ट वर्ग - इस वर्ग के अंतर्गत पुरोहित प्रशासनिक अधिकारी आदि को सम्मिलित किया जाता था।
मध्यमवर्ग  - इस वर्ग के अंतर्गत व्यापारी कारीगर शिक्षक तथा किसानों को सम्मिलित किया जाता था।
कमजोर वर्ग - इस वर्ग के अंतर्गत मजदूरों तथा दासों को सम्मिलित किया जाता था।

हड़प्पा कालीन समाज में निम्नलिखित चार प्रजातियां पाए जाने के संदेश मिलते हैं -
अल्पाइन
भूमध्यसागरीय (जो कि सबसे अधिक थे)
प्रोटो आस्ट्रेलायड
मंगोलायड

स्त्रियों की दशा -


  • हड़प्पाकालीन समाज मातृ प्रधान समाज था यहां पर शक्ति तथा उर्वरता के रूप में स्त्री की पूजा की जाती थी ।
  • हड़प्पा कालीन सभ्यता से सती प्रथा के भी साक्ष्य मिले हैं।
  • लोथल से 3 युग्मित समाधियां प्राप्त हुई हैं।
  • कालीबंगा से कई युग्मित समाधियां प्राप्त हुई हैं।


खानपान -

हड़प्पाकालीन लोग शाकाहारी तथा मांसाहारी दोनों ही थे।

वेशभूषा -


  • हड़प्पा कालीन लोग सूती तथा ऊनी दोनों प्रकार के वस्त्रों का प्रयोग करते थे।
  • सूती शॉल के साक्ष्य मोहनजोदड़ो से प्राप्त हुए हैं।
  • हड़प्पाकालीन लोग मुख्यतः सोना, चांदी ,मणिक
  •  हाथी दांत, शंख ,सीप, तथा मिट्टी के आभूषणों का प्रयोग करते थे।


मनोरंजन के साधन -

हड़प्पा कालीन लोग मुख्यतः शिकार खेलना, मछली पकड़ना,, पशु पक्षियों को लड़ाना, चौपाल और पासा खेलना, ढोल मंजीरे बजाना, तथा नृत्य व गीत आदि से अपना मनोरंजन करते थे।

हड़प्पा कालीन धार्मिक जीवन -


  • हड़प्पा कालीन लोग मातृदेवी की पूजा करते थे।
  • यह लोग पशुपति देव की भी पूजा करते थे। जिसके साक्ष्य मोहनजोदड़ो की मुहरों में मिलते हैं।
  • इस सभ्यता के लोग वृषभ पूजा भी करते थे। जिसमें वे मुख्यतः एक सींग वाला बैल की पूजा विशेष रुप से करते थे इसके साक्ष्य मोहनजोदड़ो से प्राप्त हुए हैं।
  • यहां के लोग जल पूजा, अग्नि पूजा, वृक्ष पूजा, पशु पूजा, तथा नाग पूजा भी करते थे।


हड़प्पाकालीन सभ्यता का पतन -


  • इस सभ्यता का पतन कई वर्षों के निरंतर विकसित होती गई संस्कृति विकास के क्रम में पाया जाता है। जैसे की नगरी विकास के लक्षणों का धीरे-धीरे अंत होने लगा।
  • चौड़ी सड़कें तंग गलियों में बदल गई।
  • पूर्व के नियोजित घरों का स्थान बेतरतीब घरों ने ले लिया।
  • घर के अंदर के बड़े आंगन छोटे-छोटे आंगनों में बदल गए तथा आंगन में पतली दीवारें उठ गई।
  • पक्की ईंटों का प्रयोग के स्थान पर पुरानी ईंटों का प्रयोग होने लगा।
  • बहावलपुर क्षेत्र में 174 बस्तियों में से 50 बस्तियां रह गई।
  • हड़प्पा मोहनजोदड़ो तथा लोथल से बस्तियां पूर्वी क्षेत्रों( उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात) मैं जाने लगी।
  • मेसोपोटामिया सभ्यता में भी सन 1900 BC के बाद 

भारतीय संविधान CHAPTER - 4 / संविधान की उद्देशिका अथवा प्रस्तावना



भारतीय संविधान की उद्देशिका अथवा प्रस्तावना 

नेहरू द्वारा प्रस्तुत उद्देश्य संकल्प में जो आदर्श प्रस्तुत किया गया उन्हें ही संविधान की उद्देशिका में शामिल किया गया है। संविधान के 42वे संशोधन (1976) द्वारा यथा संशोधित यह उद्देशिका निम्न प्रकार है। 

"हम भारत के लोग , भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्वसम्पन्न , समाजवादी , पंथनिरपेक्ष , लोकतंत्रात्मक , गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिको को ;  सामाजिक , आर्थिक और राजनैतिक न्याय, विचार ,  अभिव्यक्ति , विश्वास , धर्म और उपासना की स्वतंत्रता प्रतिष्ठा तथा अवसर की समानता प्राप्त करने के लिए तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखण्डता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर 1949 ई० (मिति मार्ग शीर्ष शुक्ल सप्तमी सम्वत दो हज़ार छह विक्रम) को एतद द्वारा इस संविधान को अंगीकृत , अधिनियमित और आत्मार्पित करते है। ''

संविधान की मुख्य बाते -

  • प्रस्तावना संविधान का आमुख / मुख्य पृष्ठ है जो की संविधान की प्रकृति का परिचय देता है। 
  • प्रस्तावना के अनुसार संविधान के अधीन समस्त शक्तियों का केंद्रबिंदु अथवा स्त्रोत भारत के नागरिक है। 
  • संविधान के 42वे संशोधन (1976) द्वारा इसमें समाजवाद , पंथनिरपेक्ष , तथा अखण्डता शब्द जोड़े गए। 
  • प्रस्तावना में समाजवाद रखने का मामला K.T. शाह ने उठाया। 



प्रस्तावना के सम्बन्ध में विचरको के मत -



  • प्रस्तावना देश की राजनीतिक कुंडली है।  - K.M. मुंशी 
  • प्रस्तावना संविधान की आत्मा है।  - भार्गव 
  • प्रस्तावना संविधान की कुंजी है।  - बार्कर 

NOTE - सामान्य दशा में प्रस्तावना कको ही संविधान की आत्मा मन जाता है।  किन्तु B.R. अम्बेडकर ने अनुच्छेद - 32 को संविधान की आत्मा कहा है। 


व्यक्तियों के लिए प्रस्तावना की मूल्यात्मक अवधारणा -



  • स्वतंत्रता - विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास , धर्म , उपासना की स्वंत्रता।  
  • समानता - प्रतिष्ठा तथा अवसर की समानता। 
  • न्याय - सामाजिक, आर्थिक , तथा राजनैतिक न्याय। 
  • बंधुत्व - व्यक्ति की गरिमा तथा एकता सुनिश्चित करता है। 
  • अत; यह एक आदर्श व्यवस्था है जो की संविधान का दर्शन भी है। 



राज्य के लिए अवधारणा -



  • सत्ता का ज्ञान - जनता सर्वोपरि है। 
  • राष्ट्र की प्रकृति - संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्र , तथा गणराज्य। 
  • राज्य का उद्देश्य - जन कल्याण की भावना। 



संविधान से सम्बंधित प्रमुख तिथियां  - 



  • संविधान को स्वीकार किया गया - 26 Nov. 1949
  • संविधान को लागू किया गया - 26 Jan. 1950 
  • संविधान सभा की पहली बैठक - 9 Dec. 1946 (सच्चिदानन्द सिन्हा को अस्थाई अध्यक्ष चुना गया।)
  • संविधान सभा की दूसरी बैठक - 11 Dec. 1946 (राजेंद्र प्रसाद को स्थाई अध्यक्ष चुना गया।)
  • संविधान सभा की तीसरी बैठक - 13 Dec. 1946 (उद्देश्य प्रस्ताव रखा गया)
  • संविधान सभा में प्रस्ताव पारित होने की तिथि - 22 Jan. 1947



प्रस्तावना संविधान का अंग है या नहीं- 

1. बेरुवारी यूनियन वाद (1960)- इसके निर्णय के अनुसार प्रस्तावना को संविधान का अंग नहीं माना गया।  

2. केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973)- इसके निर्णय के अनुसार प्रस्तावना को संविधान का अंग माना गया। 
3. S.R. बोम्बाई वाद (1994)- इसके निर्णय के अनुसार प्रस्तावना को संविधान का अंग माना गया। 

प्रस्तावना में संशोधन सम्बन्धी वाद - 

अपीलार्थी पक्ष का मानना था की - प्रस्तावना संविधान की आत्मा है अत: संशोधन से संविधान की प्रकृति नष्ट हो जायगी। 
सरकार पक्ष का मानना था की - प्रस्तावना संविधान का अंग है अत: संशोधन कर सकते है। 
न्यायलय का निर्णय - प्रस्तावना में संशोधन हो सकता है किन्तु मूल ढांचा नष्ट नहीं होना चाहिए। 

विश्लेषण -

 महत्व - 


  • प्रस्तावना नागरिको को स्वंत्रता का आश्वासन देता है। 
  • प्रतिष्ठा तथा अवसर की समानता की बात करता है। 
  • प्रस्तावना संविधान का दर्शन है। 
  • यह सरकार का मार्गदर्शक है। 
  • सामाजिक , राजनैतिक एवं आर्थिक आधार पर परिभाषित व्यक्ति एवं सरकार के सम्बन्ध को मजबूत करता है। 

समस्या -



  • राजनैतिक पार्टिया अपने निजी स्वार्थ हेतु संशोधन करती है। 
  • प्रस्तावना का कोई क़ानूनी महत्व नहीं है। 
  • विधायिका तथा कार्यपालिका में सम्बन्ध कठोर होते है।  

Monday, September 3, 2018

सिंधु घाटी सभ्यता - 2 / उत्पत्ति, नगर

                                  

 उत्पत्ति -

सिंधु घाटी सभ्यता की उत्पत्ति एवं विकास को लेकर विद्वानों का अलग अलग मत है- 
१. विदेशी उत्पत्ति का मत 
२. देशी उत्पत्ति का मत 


विदेशी उत्पत्ति का मत - इस मत के अनुसार हड़प्पा सभ्यता की उत्पत्ति मेसोपोटामिया की सभ्यता के विस्तार स्वरुप हुई थी। इस मत के समर्थन करने वाले विद्वानों में जॉन मार्शल , क्रेमर , H.D. सांकलिया प्रमुख है।KNOW MORE  



देशी उत्पत्ति का मत (क्रमिक विकास) - इस मत को मानने वालो में भी  अलग अलग मत है - 
१. ईरानी - बलूचिस्तान सभ्यता का विकास 
इस मत के प्रमुख पक्षधर विद्वान फेयर सर्विसव तथा रोमिला थापर है।  
२. सोथी संस्कृति का विकास - 
इस मत के प्रमुख पक्षधर विद्वानों में अम्लानन्द घोष , आल्चिन दम्पति तथा D.P. अग्रवाल है। 
नोट - साथी संस्कृति की खोज सं 1953 में अमलानंद घोष ने राजस्थान में की थी। 

ड़प्पा कालीन नगर
 सिंधु घाटी सभ्यता को प्रथम नगरीय सभ्यता कहते है तथापि इसमें खोजे गए 1400 से अधिक स्थलों में केवल 7 स्थलों को ही नगर की संज्ञा दी गयी है।  जो  निम्न है - 

१. हड़प्पा 

२. मोहनजोदड़ो 

३. लोथल 

४. धौलावीरा 

५. कालीबंगा 

६. चन्हूदड़ो 

७. बनवाली 


नोट - सभी नगर दो भागो में बटे थे - 
. पूर्वी टीला - नगर 
२. पश्चिमी टीला - यह दुर्ग या गढ़ी था जहां उच्च वर्ग के लोग रहते थे।  KNOW MORE


हड़प्पा - 



  • यह नगर पकिस्तान के पंजाब प्रान्त के मांटगुमरी जिला (आधुनिक शाहीवाल) में स्थित था।  
  • यह रावी नदी के बाये तट पर बसा था।  
  • पश्चिमी टीला दुर्ग से घिरा था।  जिसे AB टीला नाम दिया गया  है।  
  • AB टीले के उत्तर में F टीला पाया गया।  जिसमे अन्नागार (दी पंक्तियों में 6+6=12) , 15 श्रमिक आवास , 18 वृत्ताकार चबूतरे मिले है। 
  • गेहूं व जौ के दाने के साक्ष्य मिले है। 
  • AB टीला से लकड़ी की कब्र मिली है जिसे R-37 नाम दिया गया है। 
  • इस नगर के खोज से सम्बंधित व्यक्ति -
  1.  निदेशक - जॉन मार्शल 
  2. उत्खननकर्ता - दयाराम साहनी 
  3. सहायक - माधवस्वरूप वत्स 
  • यह नगर सन 1921 में खोजा गया। 
  • नगर क्षेत्र से ताम्बे की इक्कागाड़ी तथा सर्वाधिक अभिलेखी मुहरों के साक्ष्य मिले है। 

मोहनजोदड़ो -


  • नगर पाकिस्तान के सिंध प्रान्त के लरकाना जिले में पाया गया।  
  • यह सिंधु नदी के दाएं तट पर बसा है। 
  • 1922 में राखालदास बनर्जी द्वारा इसे उत्खनित (खोजा) किया गया। 
  • जॉन मार्शल के अनुसार यह नगर सात बार बाढ़ के डूबा था।  
  • KUR कैनेडी के अनुसार भीषण मलेरिया के इस नगर का पतन हुआ। 
  • यह नगर इस सभ्यता का सर्वाधिक जनसँख्या वाला नगर था जिसकी कुल आबादी लगभग 35 से 40  हज़ार थी। KNOW MORE
  • इसके अन्य उपनाम इस प्रकार है - 
  1. मृतकों का टीला 
  2. प्रेतों का नगर 
  3. सिंधु का बाग 
  4. स्तूप टीला 
  • हड़प्पा तथा मोहनजोदड़ो को जुड़वाँ राजधानी कहा गया है। 
  • क्षेत्रफल की दृष्टि से यह नगर इस सभ्यता का दूसरा सबसे बड़ा नगर था।
  • पश्चिमी टीले से सभा भवन, पुरोहित आवास , महाविद्यालय तथा घर आदि के साक्ष्य मिले है 
  • प्रत्येक घर से कुंआ , स्नानागार , 3 से 4 कमरे , तथा दोकमंजिला घर प्राप्त हुए है।  
  • पश्चिमी टीले में अन्नागार , वृहत स्नानागार (जॉन मार्शल के अनुसार तत्कालीन विश्व का सबसे बड़ा आश्चर्य) प्राप्त हुआ है। 
  • सबसे बड़ी इमरती संरचना अन्नागार प्राप्त हुई है। 
  • पूर्वी टीले से प्राप्त कुछ विशेष साक्ष्य -
  1. 10 इंच की कांस्यमूर्ति प्रोटोस्टाइलट प्रजाति की। 
  2. 1200 मुहरे (सर्वाधिक) वर्गाकार प्राप्त हुई है।  
  3. सूती कपडा चाकू के साथ। 
  4. एक 10 मीटर चौड़ा राजपथ मार्ग पाया गया। 
  5. पक्की सड़को का एक मात्र स्थान पाया गया।  




 लोथल 



  •  यह नगर भारत के गुजरात में अहमदाबाद जिले में पाया गया है। 
  • यह भोगवा नदी के तट पर खंभात की खाड़ी के समीप पाया गया है। 
  • इसकी खोज SR राव ने सन 1954  की। 
  • इसे लघु हड़प्पा या लघु मोहनजोदड़ो भी कहते है। 
  • यहां से 20 समाधियां पायी गयी है। इसे मुर्दो का नगर भी कहा जाता है। 
  • 3 युग्मित (स्त्री + पुरुष) समाधियां पायी गयी है। जो की सती प्रथा का प्रतीक है।  
  • दोनो टीले एक ही प्राचीर से घिरे थे। ( सुरकोतड़ा में भी) 
  • रंगाई कुंड , आटा पीसने की चक्की , मनका बनाने के कारखाने आदि के साक्ष्य प्राप्त हुए है। 
  • अग्निकुंड के साक्ष्य प्राप्त हुए है।  
  • धान तथा बाजरा के साक्ष्य।
  • ममी का मॉडल प्राप्त हुआ है। KNOW MORE
  • गोरिल्ला व बारहसिंहा के छाप की मुहरे प्राप्त हुई है। 
  • दो मुँह वाले राक्षस छाप की मुहरे प्राप्त हुई जो की फारस से सम्बंधित है। 
  • गोड़ीवाड़ा बंदरगाह प्राप्त हुआ। 
  • हाथी दन्त का पैमाना प्राप्त हुआ है। 


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